बनारस में बोली जानेवाली भाषा का नाम है काशिका। काशिका का उत्स है काशी और काशी संस्कृत शब्द काश से निःसृत है; जिसका अर्थ है चमकना, प्रकट होना, प्रदर्शित करना, उद्घाटित करना, प्रकाशित करना, व्यक्त करना, खिलना, खुलना और जलना।
एक शब्द के इन अनेक आशयों से स्पष्ट है कि काशिका सिर्फ़ भाषा नहीं, संसार की इस सबसे पुरानी जागती हुई बस्ती का जीवन-छंद भी है।
रंग और राग के इस नियमित उत्सव में काशिका के इन सभी आशयों का विन्यास है।
काशी का सांस्कृतिक कैलेंडर, अर्थात् एक ऐसी स्लेट, जो पहले से ही सत्यम, शिवम और सुंदरम के नाना शब्दार्थों से भरी हुई है। लेकिन फिर भी, उसमें एक और त्योहार—रंग और राग के एक और उत्सव की जगह ख़ाली है। सो, सात वार और नौ त्योहार वाली इस धुरंधर सभ्यता में यह उत्सव भी अपना स्थान बना लेगा—एक हस्ताक्षर जितनी जगह।
असल में, यह उत्सव काशी के शास्त्र और काशी के लोक को श्रद्धालु पर्यटकों, संगीत-कला-रसिकों, स्थानीय नागरिकों और आनेवाली पीढ़ियों के लिये सरल और सरस बनाकर प्रस्तुत कर देने की पेशकश है।


काशिका क्या है ?
Rooted in Kashi's Spirit
Kashika Culture brings alive Kashi's rich heritage through art, music, and vibrant cultural gatherings.


A heartfelt celebration of Kashi's soul.
Anjali R.
"
Our Spirit
Rooted in Kashi’s legacy, we bring vibrant cultural experiences alive.
Artistry Alive


Showcasing folk art forms that echo Kashi’s soulful heritage.




Theatre Tales
Engaging performances that breathe new life into timeless Kashi narratives.
Hands-on sessions celebrating Kashi’s exquisite craft traditions.
Crafting Roots


Rhythms
Moments capturing Kashi’s lively cultural heartbeat.










